सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा

चौपाई २, दोहा २१३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरम यहु नाथ हमारा॥ भरत बचन मुनिबर मन भाए। सुचि सेवक सिष निकट बोलाए॥ २ ॥

अर्थ

हे नाथ! आपकी आज्ञा को सिर चढ़ाकर उसका पालन करना, यह हमारा परम धर्म है। भरतजी के ये वचन मुनिश्रेष्ठ के मन को अच्छे लगे। उन्होंने विश्वासपात्र सेवकों और शिष्यों को पास बुलाया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।

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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार