सावकास सुनि सब सिय सासू
सावकास सुनि सब सिय सासू
चौपाई २, दोहा २८१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू॥ कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी॥ २ ॥
अर्थ
उनसे यह सुनकर कि सीता की सब सासुएँ इस समय फुरसत में हैं, जनकराज का रनिवास उनसे मिलने आया। कौसल्याजी ने आदरपूर्वक उनका सम्मान किया और समयोचित आसन लाकर दिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २८१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।
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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील