ससुर भानुकुल भानु भुआलू
ससुर भानुकुल भानु भुआलू
चौपाई ४, दोहा १९९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू॥ प्राननाथु रघुनाथ गोसाईं। जो बड़ होत सो राम बड़ाईं॥ ४ ॥
अर्थ
सूर्यकुल के सूर्य राजा दशरथजी जिनके ससुर हैं, जिनको अमरावती के स्वामी इन्द्र भी सिहाते थे (ईर्ष्यापूर्वक उनके-जैसा ऐश्वर्य और प्रताप पाना चाहते थे); और प्रभु श्रीरघुनाथजी जिनके प्राणनाथ हैं, जो इतने बड़े हैं कि जो कोई भी बड़ा होता है, वह श्रीरामचन्द्रजी की [दी हुई] बड़ाई से ही होता है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।
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भरत-निषाद मिलन