पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी
पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी
दोहा १९९ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि। बिहरत हृदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि॥ १९९ ॥
अर्थ
उन श्रेष्ठ पतिव्रता स्त्रियों में शिरोमणि सीताजी की साथरी (कुशशय्या) देखकर मेरा हृदय हहराकर (दहलकर) फट नहीं जाता; हे शम्भो! यह वज्र से भी अधिक कठोर है!
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का दोहा १९९ है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।
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भरत-निषाद मिलन