सरित समीप राखि सब लोगा

चौपाई ३, दोहा २३३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा॥ चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई॥ ३ ॥

अर्थ

फिर सबको नदी के समीप रखकर तथा माता, गुरु और मन्त्री की आज्ञा माँगकर भरतजी वहाँ चले जहाँ सीताजी और श्रीरघुराई थे। साथ में निषादनाथ और छोटे भाई थे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा लक्ष्मण को भरत की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को शांत करके भरतजी के निष्कलुष प्रेम और धर्मनिष्ठा की महिमा का वर्णन है।

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राम द्वारा लक्ष्मण को भरत की महिमा