लखन राम सियँ सुनि सुर बानी

चौपाई २, दोहा २३३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी॥ इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए॥ २ ॥

अर्थ

लक्ष्मणजी, श्रीरामचन्द्रजी और सीताजी ने देवताओं की वाणी सुनकर अत्यन्त सुख पाया, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। यहाँ भरतजी ने सबके साथ पवित्र मन्दाकिनी में स्नान किया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा लक्ष्मण को भरत की महिमा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा लक्ष्मण को शांत करके भरतजी के निष्कलुष प्रेम और धर्मनिष्ठा की महिमा का वर्णन है।

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राम द्वारा लक्ष्मण को भरत की महिमा