सरल सुभाय मायँ हियँ लाए
सरल सुभाय मायँ हियँ लाए
चौपाई १, दोहा १६५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए॥ भेंटेउ बहुरि लखन लघु भाई। सोकु सनेहु न हृदयँ समाई॥ १ ॥
अर्थ
सरल स्वभाववाली माताने बड़े प्रेम से भरतजी को छाती से लगा लिया; मानो श्रीरामजी ही लौटकर आ गये हों। फिर लक्ष्मणजी के छोटे भाई को हृदय से लगाया। शोक और स्नेह हृदय में समाता नहीं है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।
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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि