देखि सुभाउ कहत सबु कोई
देखि सुभाउ कहत सबु कोई
चौपाई २, दोहा १६५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि सुभाउ कहत सबु कोई। राम मातु अस काहे न होई॥ माताँ भरतु गोद बैठारे। आँसु पोंछि मृदु बचन उचारे॥ २ ॥
अर्थ
कौसल्याजी का स्वभाव देखकर सब कोई कह रहे हैं—श्रीराम की माता का ऐसा स्वभाव क्यों न हो। माता ने भरतजी को गोद में बैठा लिया और उनके आँसू पोंछकर कोमल वचन बोलीं—।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।
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भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि