सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन

दोहा ३२१ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर। भगति ग्यानु बैराग्य जनु सोहत धरें सरीर॥ ३२१ ॥

अर्थ

छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजी समेत प्रभु श्रीरामचन्द्रजी पर्णकुटी में ऐसे सुशोभित हो रहे हैं मानो वैराग्य, भक्ति और ज्ञान शरीर धारण करके शोभित हो रहे हों।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का दोहा ३२१ है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास