मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू
मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू
चौपाई १, दोहा ३२२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू॥ प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं। सब चुपचाप चले मग जाहीं॥ १ ॥
अर्थ
मुनि, ब्राह्मण, गुरु, भरत और राजा—सारा समाज श्रीरामचन्द्रजी के विरह में विह्वल है। प्रभु के गुणसमूहों का मन में स्मरण करते हुए सब लोग मार्ग में चुपचाप चले जा रहे हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास