बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की

चौपाई ४, दोहा ३२१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की। बरषि सुमन कहि गति घर घर की॥ प्रभु प्रनामु करि दीन्ह भरोसो। चले मुदित मन डर न खरो सो॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी की दशा देखकर देवताओं ने उन पर फूल बरसाकर अपनी घर-घर की दशा कही (दुखड़ा सुनाया)। प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ने उन्हें प्रणाम कर आश्वासन दिया। तब वे प्रसन्न होकर चले, मन में जरा-सा भी डर न रहा।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास