सानुज मिलि पल महुँ सब काहू

चौपाई २, दोहा २४४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सानुज मिलि पल महुँ सब काहू। कीन्ह दूरि दुखु दारुन दाहू॥ यह बड़ि बात राम कै नाहीं। जिमि घट कोटि एक रबि छाहीं॥ २ ॥

अर्थ

उन्होंने लक्ष्मणजी सहित पल भर में सब किसी से मिलकर उनके दुःख और दारुण दाह को दूर कर दिया। श्रीरामचन्द्रजी के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। जैसे करोड़ों घटों में एक सूर्य की छाया एक साथ ही दीखती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध