लखन सपन यह नीक न होई
लखन सपन यह नीक न होई
चौपाई ४, दोहा २२६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई॥ अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने॥ ४ ॥
अर्थ
[और बोले--] लक्ष्मण ! यह स्वप्न अच्छा नहीं है। कोई भीषण कुसमाचार (बहुत ही बुरी खबर) सुनायेगा। ऐसा कहकर उन्होंने भाई सहित स्नान किया और त्रिपुरारि महादेवजी का पूजन करके साधुओं का सम्मान किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी के अशुभ स्वप्न, भरतजी के आगमन की सूचना और लक्ष्मणजी के क्रोध का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सीता का स्वप्न, भरत के आगमन की सूचना, लक्ष्मण का क्रोध