समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना
समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना
चौपाई २, दोहा ३३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना। जीवनु राम दरस आधीना॥ सुनि मृदु बचन कुमति अति जरई। मनहुँ अनल आहुति घृत परई॥ २ ॥
अर्थ
हे चतुर प्रिये! जी में समझकर देख, मेरा जीवन श्रीराम के दर्शन के अधीन है। राजा के मृदु वचन सुनकर दुर्बुद्धि कैकेयी अत्यन्त जल रही है। मानो अग्नि में घी की आहुतियाँ पड़ रही हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना