कहइ करहु किन कोटि उपाया
कहइ करहु किन कोटि उपाया
चौपाई ३, दोहा ३३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया॥ देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मोहि न बहुत प्रपंच सोहाहीं॥ ३ ॥
अर्थ
आप करोड़ों उपाय क्यों न करें, यहाँ आपकी माया नहीं लगेगी। देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मुझे बहुत प्रपंच नहीं सुहाते।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना