सकउँ तोर अरि अमरउ मारी
सकउँ तोर अरि अमरउ मारी
चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सकउँ तोर अरि अमरउ मारी। काह कीट बपुरे नर नारी॥ जानसि मोर सुभाउ बरोरू। मनु तव आनन चंद चकोरू॥ २ ॥
अर्थ
तेरा शत्रु अमर (देवता) भी हो, तो मैं उसे भी मार सकता हूँ। बेचारे कीड़े-मकोड़े-सरीखे नर-नारी तो चीज ही क्या हैं। हे सुन्दरि! तू तो मेरा स्वभाव जानती ही है कि मेरा मन सदा तेरे मुखरूपी चन्द्रमा का चकोर है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना