अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा
अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा
चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा॥ कहु केहि रंकहि करौं नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू॥ १ ॥
अर्थ
हे प्रिये! किसने तेरा अनिष्ट किया? किसके दो सिर हैं? यमराज किसको लेना (अपने लोक को ले जाना) चाहते हैं ? कह, किस कंगाल को राजा कर दूँ या किस राजा को देश से निकाल दूँ।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना