प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें
प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें
चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें। परिजन प्रजा सकल बस तोरें॥ जौं कछु कहौं कपटु करि तोही। भामिनि राम सपथ सत मोही॥ ३ ॥
अर्थ
हे प्रिये! मेरी प्रजा, कुटुम्बी, सर्वस्व (सम्पत्ति), पुत्र, यहाँ तक कि मेरे प्राण भी, ये सब तेरे वश में (अधीन) हैं। यदि मैं तुझसे कुछ कपट करके कहता होऊँ तो हे भामिनी! मुझे सौ बार राम की सौगंध है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना