सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा

चौपाई ४, दोहा १८९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा॥ का आचरजु भरतु अस करहीं। नहिं बिष बेलि अमिअ फल फरहीं॥ ४ ॥

अर्थ

सम्पूर्ण देवता और दैत्य वीर जुट जाय, तो भी श्रीरामजी को रण में जीतनेवाला कोई नहीं है। भरत जो ऐसा कर रहे हैं, इसमें आश्चर्य ही क्या है? विष की बेलें अमृत-फल कभी नहीं फलतीं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।

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निषाद की शंका और सावधानी