जानहिं सानुज रामहि मारी
जानहिं सानुज रामहि मारी
चौपाई ३, दोहा १८९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी॥ भरत न राजनीति उर आनी। तब कलंकु अब जीवन हानी॥ ३ ॥
अर्थ
समझते हैं कि छोटे भाई लक्ष्मण सहित श्रीराम को मारकर सुख से निष्कण्टक राज्य करूँगा। भरत ने हृदय में राजनीति को स्थान नहीं दिया। तब [पहले] तो कलंक ही था, अब तो जीवन से ही हाथ धोना पड़ेगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “निषाद की शंका और सावधानी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत की सेना देख निषादराज गुह की शंका और सावधानी का वर्णन है।
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निषाद की शंका और सावधानी