सकल सौच करि राम नहावा

चौपाई २, दोहा ९४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल सौच करि राम नहावा। सुचि सुजान बट छीर मगावा॥ अनुज सहित सिर जटा बनाए। देखि सुमंत्र नयन जल छाए॥ २ ॥

अर्थ

शौच के सब कार्य करके [नित्य] पवित्र और सुजान श्रीरामचन्द्रजी ने स्नान किया। फिर वट का दूध मँगाया और छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित उस दूध से सिर पर जटाएँ बनायीं। यह देखकर सुमन्त्रजी के नेत्रों में जल छा गया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।

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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी