हृदयँ दाहु अति बदन मलीना

चौपाई ३, दोहा ९४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

हृदयँ दाहु अति बदन मलीना। कह कर जोरि बचन अति दीना॥ नाथ कहेउ अस कोसलनाथा। लै रथु जाहु राम कें साथा॥ ३ ॥

अर्थ

उनका हृदय अत्यन्त जलने लगा, मुँह मलिन (उदास) हो गया। वे हाथ जोड़कर अत्यन्त दीन वचन बोले--हे नाथ! मुझे कोसलनाथ दशरथजी ने ऐसी आज्ञा दी थी कि तुम रथ लेकर श्रीरामजी के साथ जाओ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-निषाद संवाद, सीता-राम से विदा लेकर सुमंत्र के भारी मन से अयोध्या लौटने का वर्णन है।

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लक्ष्मण-निषाद संवाद, सुमंत्र की वापसी