सकइ न बोलि बिकल नरनाहू

चौपाई १, दोहा ७७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू॥ नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा॥ १ ॥

अर्थ

राजा व्याकुल हैं, बोल नहीं सकते। हृदय में शोक से उत्पन्न हुआ भयानक सन्ताप है। तब रघुकुल के वीर श्रीरामचन्द्रजी ने अत्यन्त प्रेम से चरणों में सिर नवाकर उठकर विदा माँगी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम, सीता और लक्ष्मण द्वारा दशरथ से वन-गमन की विदाई और सीता के अटल निश्चय का वर्णन है।

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दशरथ से विदाई, सीता का अटल निश्चय