सैल हिमाचल आदिक जेते

चौपाई ४, दोहा १३८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते॥ बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई॥ ४ ॥

अर्थ

और हिमाचल आदि जितने पर्वत हैं, सभी चित्रकूट का यश गाते हैं। विंध्याचल बड़ा आनन्दित है, उसके मन में सुख समाता नहीं; क्योंकि उसने बिना परिश्रम ही बहुत बड़ी बड़ाई पा ली है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा