सब सर सिंधु नदीं नद नाना
सब सर सिंधु नदीं नद नाना
चौपाई ३, दोहा १३८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सब सर सिंधु नदीं नद नाना। मंदाकिनि कर करहिं बखाना॥ उदय अस्त गिरि अरु कैलासू। मंदर मेरु सकल सुरबासू॥ ३ ॥
अर्थ
सारे सर, समुद्र, नदी और अनेकों नदियाँ सब मन्दाकिनी की बड़ाई करते हैं। उदयाचल, अस्ताचल, कैलास, मंदर और मेरु आदि सब देवताओं के निवास-स्थान हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा