चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप
चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप
दोहा १३८ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति। पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति॥ १३८ ॥
अर्थ
चित्रकूट के पक्षी, मृग, बेल, वृक्ष, तृण-आदि सभी जातियाँ पुण्य की राशि हैं और धन्य हैं—देवता दिन-रात ऐसा कहते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का दोहा १३८ है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा