सई उतरि गोमतीं नहाए

चौपाई ३, दोहा ३२२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सई उतरि गोमतीं नहाए। चौथें दिवस अवधपुर आए॥ जनकु रहे पुर बासर चारी। राज काज सब साज सँभारी॥ ३ ॥

अर्थ

फिर सई पार करके गोमती जी में स्नान किया और चौथे दिन सब अयोध्या आ पहुँचे। जनकजी चार दिन नगर में रहे और राजकाज तथा सब साज-सामान सँभालते रहे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास