जमुना उतरि पार सबु भयऊ
जमुना उतरि पार सबु भयऊ
चौपाई २, दोहा ३२२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ॥ उतरि देवसरि दूसर बासू। रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू॥ २ ॥
अर्थ
सब लोग यमुना पार करके आगे बढ़े। वह दिन बिना भोजन के ही बीत गया। गंगा पार करके दूसरे दिन का ठिकाना हुआ। वहाँ रामसखा निषादराज ने सबकी अच्छी व्यवस्था कर दी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास