सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू

चौपाई ४, दोहा ३२२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू। तेरहुति चले साजि सबु साजू॥ नगर नारि नर गुर सिख मानी। बसे सुखेन राम रजधानी॥ ४ ॥

अर्थ

मन्त्रियों, गुरुजी और भरतजी को राज्य सौंपकर, सारा साज-सामान ठीक करके तिरहुत को चले। नगर की स्त्री-पुरुष गुरुजी की शिक्षा मानकर श्रीरामजी की राजधानी अयोध्या में सुखपूर्वक रहने लगे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।

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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास