राज काज सब लाज पति धरम
राज काज सब लाज पति धरम
दोहा ३०५ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
राज काज सब लाज पति धरम धरनि धन धाम। गुर प्रभाउ पालिहि सबहि भल होइहि परिनाम॥ ३०५ ॥
अर्थ
राज-काज, सब लाज, प्रतिष्ठा, धर्म, पृथ्वी, धन, धाम—इन सभी का पालन (रक्षण) गुरुजी का प्रभाव (सामर्थ्य) करेगा और परिणाम शुभ होगा।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का दोहा ३०५ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद