सहित समाज राउ मिथिलेसू

चौपाई ३, दोहा २९० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सहित समाज राउ मिथिलेसू। बहुत दिवस भए सहत कलेसू॥ उचित होइ सोइ कीजिअ नाथा। हित सबही कर रौरें हाथा॥ ३ ॥

अर्थ

मिथिलापति राजा जनकजी को भी समाज सहित क्लेश सहते बहुत दिन हो गये। इसलिये हे नाथ! जो उचित हो वही कीजिये। आप ही के हाथ सभी का हित है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “जनक-सुनयना संवाद, भरत की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक और सुनयना द्वारा भरतजी के त्याग, विनय और भ्रातृभक्ति की महिमा का संवाद का वर्णन है।

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जनक-सुनयना संवाद, भरत की महिमा