सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल

दोहा ४२ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान। चलइ जोंक जल बक्रगति जद्यपि सलिलु समान॥ ४२ ॥

अर्थ

रघुकुल में श्रेष्ठ श्रीरघुबर के स्वभाव से ही सीधे वचनों को दुर्बुद्धि कैकेयी टेढ़ा ही करके जान रही है; जैसे यद्यपि जल समान ही होता है, परन्तु जोंक उसमें टेढ़ी चाल से ही चलती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-कैकेयी-संवाद” प्रकरण का दोहा ४२ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा कैकेयी की आज्ञा को सहज भाव से स्वीकार कर वनवास के लिए तत्पर होने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीराम-कैकेयी-संवाद