रहसी रानि राम रुख पाई

चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई॥ सपथ तुम्हार भरत कै आना। हेतु न दूसर मैं कछु जाना॥ १ ॥

अर्थ

रानी कैकेयी श्रीरामचन्द्रजी का रुख पाकर हर्षित हो गयी और कपटपूर्ण स्नेह दिखाकर बोली--तुम्हारी शपथ और भरत की सौगन्ध है, मुझे राजा के दुःख का दूसरा कुछ भी कारण विदित नहीं है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-कैकेयी-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा कैकेयी की आज्ञा को सहज भाव से स्वीकार कर वनवास के लिए तत्पर होने का वर्णन है।

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श्रीराम-कैकेयी-संवाद