सबहिं बिचारु कीन्ह मन माहीं
सबहिं बिचारु कीन्ह मन माहीं
चौपाई ३, दोहा ८४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सबहिं बिचारु कीन्ह मन माहीं। राम लखन सिय बिनु सुखु नाहीं॥ जहाँ रामु तहँ सबुइ समाजू। बिनु रघुबीर अवध नहिं काजू॥ ३ ॥
अर्थ
सब ने मन में विचार कर लिया कि श्रीरामजी, लक्ष्मणजी और सीताजी के बिना सुख नहीं है। जहाँ श्रीरामजी रहेंगे, वहीं सारा समाज रहेगा। श्रीरामचन्द्रजी के बिना अयोध्या में हम लोगों का कुछ काम नहीं है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना