बिधि कैकई किरातिनि कीन्ही
बिधि कैकई किरातिनि कीन्ही
चौपाई २, दोहा ८४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बिधि कैकई किरातिनि कीन्ही। जेहिं दव दुसह दसहुँ दिसि दीन्ही॥ सहि न सके रघुबर बिरहागी। चले लोग सब ब्याकुल भागी॥ २ ॥
अर्थ
विधाता ने कैकेयी को भीलनी बनाया, जिसने दसों दिशाओं में दुःसह दावाग्नि (भयानक आग) लगा दी। श्रीरामचन्द्रजी के विरह की इस अग्नि को लोग सह न सके। सब लोग व्याकुल होकर भाग चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।
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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना