चले साथ अस मंत्रु दृढ़ाई

चौपाई ४, दोहा ८४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

चले साथ अस मंत्रु दृढ़ाई। सुर दुर्लभ सुख सदन बिहाई॥ राम चरन पंकज प्रिय जिन्हही। बिषय भोग बस करहिं कि तिन्हही॥ ४ ॥

अर्थ

ऐसा विचार दृढ़ करके देवताओं को भी दुर्लभ सुखों से पूर्ण घरों को छोड़कर सब श्रीरामचन्द्रजी के साथ चल पड़े। जिनको श्रीरामजी के चरणकमल प्रिय हैं, उन्हें क्या कभी विषयभोग वश में कर सकते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन और नगरवासियों को सोता छोड़कर आगे बढ़ने का वर्णन है।

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वनगमन, नगरवासियों को छोड़कर आगे बढ़ना