सब समाजु सजि सिधि पल माहीं
सब समाजु सजि सिधि पल माहीं
चौपाई ४, दोहा २१४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सब समाजु सजि सिधि पल माहीं। जे सुख सुरपुर सपनेहुँ नाहीं॥ प्रथमहिं बास दिए सब केही। सुंदर सुखद जथा रुचि जेही॥ ४ ॥
अर्थ
जो सुख के सामान स्वर्ग में भी स्वप्न में भी नहीं हैं, ऐसे सब सामान सिद्धियों ने पलभर में सज दिये। पहले तो उन्होंने सब किसी को, जिसकी जैसी रुचि थी वैसे ही, सुन्दर सुखदायक निवासस्थान दिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।
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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार