भोग बिभूति भूरि भरि राखे

चौपाई ३, दोहा २१४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भोग बिभूति भूरि भरि राखे। देखत जिन्हहि अमर अभिलाषे॥ दासीं दास साजु सब लीन्हें। जोगवत रहहिं मनहि मनु दीन्हें॥ ३ ॥

अर्थ

उन घरों में बहुत-से भोग (इन्द्रियों के विषय) और ऐश्वर्य (ठाट-बाट) का सामान भरकर रख दिया, जिन्हें देखकर देवता भी ललचा गये। दासी-दास सब प्रकार की सामग्री लिये हुए मन लगाकर उनके मनों को देखते रहते हैं (अर्थात्‌ उनके मन की रुचि के अनुसार करते रहते हैं)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।

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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार