सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं
सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं
दोहा १ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु। आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु॥ १ ॥
अर्थ
सबके हृदय में ऐसी अभिलाषा है और सब महादेवजी को मनाकर (प्रार्थना करके) कहते हैं कि राजा अपने जीते-जी श्रीरामचन्द्रजी को युवराज पद दे दें।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का दोहा १ है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना