मुदित मातु सब सखीं सहेली
मुदित मातु सब सखीं सहेली
चौपाई ४, दोहा १ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली॥ राम रूपु गुन सीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ॥ ४ ॥
अर्थ
सब माताएँ और सखी-सहेलियाँ अपनी मनोरथरूपी बेल को फली हुई देखकर आनन्दित हैं। श्रीरामचन्द्रजी के रूप, गुण, शील और स्वभाव को देख-सुनकर राजा दशरथजी बहुत ही आनन्दित होते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना