सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी

चौपाई १, दोहा ४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी॥ नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू॥ १ ॥

अर्थ

अपने जी में गुरुजी को सब प्रकार से प्रसन्न जानकर, हर्षित होकर राजा कोमल वाणी से बोले-हे नाथ! श्रीरामचन्द्र को युवराज कीजिये। कृपा करके कहिये (आज्ञा दीजिये) तो तैयारी की जाय।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना