राजन राउर नामु जसु सब अभिमत
राजन राउर नामु जसु सब अभिमत
दोहा ३ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार। फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार॥ ३ ॥
अर्थ
हे राजन्! आपका नाम और यश ही सम्पूर्ण मनचाही वस्तुओं को देनेवाला है। हे राजाओं के मुकुटमणि। आपके मन की अभिलाषा फल का अनुगमन करती है (अर्थात् आपके इच्छा करने के पहले ही फल उत्पन्न हो जाता है)।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का दोहा ३ है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना