रानि राय सन अवसरु पाई
रानि राय सन अवसरु पाई
चौपाई १, दोहा २८४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
रानि राय सन अवसरु पाई। अपनी भाँति कहब समुझाई॥ रखिअहिं लखनु भरतु गवनहिं बन। जौं यह मत मानै महीप मन॥ १ ॥
अर्थ
हे रानी! मौका पाकर आप राजा को अपनी ओर से जहाँ तक हो सके समझाकर कहियेगा कि लक्ष्मण को घर रख लिया जाय और भरत वन को जायें। यदि यह राय राजा के मन में [ठीक] जँच जाय,।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कौसल्या-सुनयना संवाद में श्रीसीताजी के शील, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन है।
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कौसल्या-सुनयना संवाद, सीता का शील