राम संग सिय रहति सुखारी
राम संग सिय रहति सुखारी
चौपाई १, दोहा १४० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम संग सिय रहति सुखारी। पुर परिजन गृह सुरति बिसारी॥ छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी। प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के साथ सीताजी अयोध्यापुरी, कुटुम्ब के लोग और घर की याद भूलकर बहुत ही सुखी रहती हैं। क्षण-क्षण पर पति श्रीरामचन्द्रजी के चन्द्रमाके समान मुख को देखकर वे वैसे ही परम प्रसन्न रहती हैं जैसे चकोरी चन्द्रमा को देखकर!
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा