छिनु छिनु लखि सिय राम पद
छिनु छिनु लखि सिय राम पद
दोहा १३९ · अयोध्याकाण्ड
दोहा पाठ
छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु। करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु॥ १३९ ॥
अर्थ
क्षण-क्षण पर श्रीसीतारामजी के चरणों को देखकर और अपने ऊपर उनका स्नेह जानकर लक्ष्मणजी स्वप्न में भी भाइयों, माता-पिता और घर की याद नहीं करते।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का दोहा १३९ है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा