राम सखाँ तब नाव मगाई
राम सखाँ तब नाव मगाई
चौपाई २, दोहा १५१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाइ चढ़े रघुराई॥ लखन बान धनु धरे बनाई। आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई॥ २ ॥
अर्थ
तब श्रीरामचन्द्रजी के सखा निषादराज ने नाव मँगवायी। पहले प्रिया सीताजी को उस पर चढ़ाकर फिर श्रीरघुनाथजी चढ़े। फिर लक्ष्मणजी ने धनुष-बाण सजाकर रखे और प्रभु श्रीरामचन्द्रजी की आज्ञा पाकर स्वयं चढ़े।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान