केवट कीन्हि बहुत सेवकाई
केवट कीन्हि बहुत सेवकाई
चौपाई १, दोहा १५१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई॥ होत प्रात बट छीरु मगावा। जटा मुकुट निज सीस बनावा॥ १ ॥
अर्थ
केवट ने बहुत सेवा की। वह रात सिंगरौर में ही बितायी। प्रातः होते ही बट-क्षीर मँगवाया और जटाओं का मुकुट अपने सिर पर बनाया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान