राम राम रट बिकल भुआलू
राम राम रट बिकल भुआलू
चौपाई १, दोहा ३७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम राम रट बिकल भुआलू। जनु बिनु पंख बिहंग बेहालू॥ हृदयँ मनाव भोरु जनि होई। रामहि जाइ कहै जनि कोई॥ १ ॥
अर्थ
राजा 'राम-राम' रट रहे हैं और ऐसे व्याकुल हैं, जैसे कोई पक्षी पंख के बिना बेहाल हो। वे अपने हृदय में मनाते हैं कि सबेरा न हो, और कोई जाकर श्रीरामचन्द्रजी से यह बात न कहे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना