परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे

दोहा ३६ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु। कपट सयानि न कहति कछु जागति मनहुँ मसानु॥ ३६ ॥

अर्थ

राजा करोड़ों प्रकार से (बहुत तरह से) समझाकर [और यह कहकर] कि तू क्यों सर्वनाश कर रही है, पृथ्वी पर गिर पड़े। पर कपट करने में चतुर कैकेयी कुछ बोलती नहीं, मानो [मौन होकर] मसान जगा रही हो (श्मशान में बैठकर प्रेतमन्त्र सिद्ध कर रही हो)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का दोहा ३६ है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना