राम मातु दुखु सुखु सम जानी

चौपाई ४, दोहा ३०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी॥ एक कहहिं रघुबीर बड़ाई। एक सराहत भरत भलाई॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी की माता ने दुःख और सुख को समान जानकर श्रीरामजी के गुण कहकर दूसरी रानियों को धैर्य बँधाया। कोई श्रीरामजी की बड़ाई (बड़प्पन) की चर्चा कर रहे हैं, तो कोई भरतजी के अच्छेपन की सराहना करते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद